12
अक्टूबर
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“Engineer-आस्तु” (हास्य-गीत)

कुछ वर्षों पहले बड़ी ही शान के साथ कहा जाता था, की “सामने वाला मकान, Engineer साहब का है”| आज माँ-बाप पढाई के प्रति इतना अधिक सचेत हैं, की बच्चे का नामकरण संस्कार बाद में होता है, वो भविष्य में क्या बनेगा पहले ही तय हो जाता है| मुझे तो संदेह है की कहीं Engineering कोई भयानक बीमारी तो नहीं| अब आप ही देख लीजिए, Virus कितनी तेज़ी से बढ़ रहा है| बच्चा 10th के बाद ही तैयारी करने में लग जाता है| मैंने तो बड़ी ही मुश्किल से पिंड छुड़ाया है, वरना रिश्ते-नातेदारों में फैला Virus हमारे घर भी आ जाता|
देश को लाखों की संख्या में Engineers की ज़रूरत है, इस बात को नकारा नहीं जा सकता| आज गली-गली खुलते कॉलेजों के बीच Engineering की पढ़ाई एक मज़ाक बन कर रह गई है| आप ने ‘तथास्तु’ सुना होगा, पर “Engineer-आस्तु”?..ये मेरा आशीर्वाद है, हर उस Student को जो दिल से Engineer बनना चाहता है| जो कोई भी Engineer वाली सोंच/प्रतिभा रखता हो वो इस क्षेत्र में खूब तरक्की प्राप्त करे, और हिन्दुस्तान का नाम रोशन करे| तो फिर “Engineer-आस्तु”-

"Engineer-आस्तु"

"Engineer-आस्तु"

“Engineer-आस्तु”

‘करियर’ से जुड़े अपने तमाम अनुभवों एवं विचारों को Comments के माध्यम से सभी पाठकों तक पहुंचा सकते हैं| हमारे विचारों से किस प्रकार सहमत/असहमत हैं, हमें अवश्य बताएँ|


35 Responses to ““Engineer-आस्तु” (हास्य-गीत)”


  1. 1 Ananya Singh
    अक्टूबर 12, 2010 को 13:29

    Very Excellent brother.
    Even my parents were serious about ENGINEERING.
    VIRUS is on…ANTIVIRUS to yahi hai ki JUST DO UR BEST and show what REALLY u are…
    Fabalous poem….I would like to hear it in ur voice..
    Keep doing..

  2. 2 Babita Sharma
    अक्टूबर 12, 2010 को 13:36

    @@@@@अति सुन्दर प्रस्तुति@@@@@
    मैं २ पुत्रों की माँ हूँ और हमेशा उनके भविष्य के बारे में चिंतित रहती हूँ.इतने सारे नए करियर चेत्र हैं की क्या सही है और क्या गलत.लेकिन engineering तो वास्तव में सच कहूँ तो बीमारी ही है.आप के विचारों से सहमत हूँ. करियर का चुनाव करते समय, बच्चों की रूचि को अवश्य ही ध्यान में रखना चाहिए. जय हिंद!

  3. 3 पहचान कौन?
    अक्टूबर 12, 2010 को 13:42

    मिल गया..मिल गया आखिर मिल ही गया…’चौथा Ideot”
    ALL IS WELLLLLLLLLLLLLLL
    अच्छा ही है की तू इंजिनियर नहीं बना!!
    लिखते रहो और दीखते रहो!

  4. 4 AMIT DEWIDI
    अक्टूबर 12, 2010 को 13:45

    that’s really nice..
    CAREER BY CHOICE I PREFER.

  5. 5 डॉ गीता यादव
    अक्टूबर 12, 2010 को 13:51

    मानस खत्री,
    बहुत ही अच्छा प्रयास है.शब्दों को बड़ी ही कुशलता से ‘नव-गीत’ में पिरोया है. सबसे अच्छी बात है विषय पर व्यंग के माध्यम से बहुत ही अच्छा सन्देश दिया है. गीत के माध्यम से व्यंग प्रस्तुत करना थोडा कठिन होता है. तुम इस कला में बहुत ही निपुण हो. माँ सरस्वती तुम पर अपनी कृपा बना कर रखें. और भी अच्छा लिखो, थोडा ध्यान भाषा पर भी दो.

    VERY GOOD…KEEP IT UP.
    regards,
    Dr Geeta Yadav

  6. 6 Ashraf khan
    अक्टूबर 12, 2010 को 14:50

    Bahut hi khas vishay ko is kavita ke madhyam se aap ne uthaya hai.
    aap ki ye rachna vaastav me dil ko choo leti hai. aur career chunav me aa rahi pareshanio ka rekhachitra kheechti hai.
    ACCHA PRAYAS HAI YUVAON TAK BAAT PAHUCHANE KA.

    ASHRAF KHAN
    (HINDUSTAN NEWSPAPER, LKO)

  7. 8 Devendra Gupta
    अक्टूबर 13, 2010 को 03:17

    bahut hi badhiyan…
    btech aur mba….jaise daal-chawal..
    jise bhi dekho wo kar raha hai.
    waise Btech se jada MBA ko preference mil raha hai…koi kuch bhi kare MBA zarur karna chahta hai..
    GOOD POEM.

  8. 9 Sunita Thapa
    अक्टूबर 13, 2010 को 11:42

    Meri to samajh me nahi ata ki sabko Engineer banne ki hi kya padi hai. aur bhi to kaam ke bahut se chheta hai. par app jo writer bane hai wahi hamare liye bahut hi achcha hai. aur pls app sada eise hi likhte rahiyega. Bahut hi tarife kabil likha hai. kam se kam ise padkar log is viruos se bachne ki kosis to kare. Thanks

  9. 10 अंकित पाठक
    अक्टूबर 13, 2010 को 11:52

    मानस जी,
    बहुत ही सुन्दर विषय को चुना है|
    आज बच्चों पर माँ-बाप और समाज का इतना दबाव है की मजबूरी वश जहाँ सबसे अधिक पैसा और भीड़ हो उसी चेत्र में जाना पड़ता है|
    किन्तु यह बिलकुल गलत है| हो सकता है वोह छात्र या छात्र किसी अन्य कार्य में अधिक कुशल हो और वाहन जा कर देश का नाम ऊँचा करे| आप की रचना बेहद पसंद आई..इसे आवाज़ के रूप में दुनिया भर तक पहुचाएं|

    मेरी शुभकामनाएं!
    अंकित पाठक

  10. 11 RAJBEER SHARMA 'प्रकाश'
    अक्टूबर 13, 2010 को 22:34

    प्रिय कवि मानस जी,
    अच्छा है भाई! तुमने कम से कम ‘पिंड’ तो छुडा लिया| यहाँ तो कक्षा १० की बोर्ड परीक्षाएं खतम हुई की बस सीधा ‘कोचिंग-क्लास’ का रास्ता नापो|
    शायद ही कोई माँ-बाप बच्चे के पैदा होने पर यह कहता है की, मेरा बेटा ‘अमिताभ बच्चन’ बनेगा| मेरी बेटी ‘साइना’ जैसी महान खिलाडी बनेगी! पता नहीं इंजीनियरिंग, डाक्टरी में आखिर ऐसा क्या है जो हर कोई इसके पीछे पड़ा है| मानस जी, सच कहा हर किसी का ख्वाब ‘विदेश’ में घर-जमाई बन कर रहने का है| मातृभूमि जाये भाड़ में!
    “इंजीनियरिंग है “बन्नी”……………” [कविता की सबसे खूबसूरत पंक्तियाँ]

    आप का गीत पढ़ कर खुशी हुई, खूब तरक्की कीजिये| मेरी तरफ से भी देश के युवाओं को “Engineer-आस्तु”……..हा.हा.हा.हा.!!

  11. 12 Pragati Verma
    अक्टूबर 13, 2010 को 22:53

    Manas,
    I am highly impressed, though i read hindi poems very rare. That’s a really awesome post. People are much interested in Engineering as it is a wide field and provides good income and Foreign exposure.But u are right saying that,”जो कोई भी Engineer वाली सोंच/प्रतिभा रखता हो वो इस क्षेत्र में खूब तरक्की प्राप्त करे, और हिन्दुस्तान का नाम रोशन करे…”
    GO FOR BEST INSTITUTES ONLY….DEGREE IS NOT EVERYTHING…WERE U REALLY STAND MATTERS!!!!!!!!!

    PRAGATI VERMA

  12. 13 ALOK SRIVASTAVA
    अक्टूबर 13, 2010 को 23:33

    बहुत ही अच्छी रचना..पढ़ कर आनंद आया………….
    आप की रचना सामाज में जागरूकता पंहुचा सकती है..

  13. 14 Pramod Das
    अक्टूबर 14, 2010 को 12:24

    Bahut sateek vichar hain!
    BEAUTIFUL POEM!

  14. 15 Akriti Jha
    अक्टूबर 15, 2010 को 09:27

    Kavita ekdam sateek hai. aur aap ne badi hi gambheer bat ko kushalta se prastut kiya hai. Aaj ka samaj Bacchon ki pratibha se jyada paisa banane aur videsh jane mein laga hua hai. Sach to ye hai ki jo bacche kuch naya karna chahte hain, uski pratibha ko KITABON KE BOJH MEIN MAAR DIYA JATA hai.

    NICE MESSAGE FOR STUDENTS AND PARENTS.

  15. 16 राजेंद्र पाठक
    अक्टूबर 15, 2010 को 10:07

    इंजीनियरिंग की शिक्षा वर्षों से चली आ रहा है. आज के युग में हर गली-चौरहे में इंजीनियरिंग कॉलेज भले ही खुल रहे हैं, किन्तु आज बच्चों की तादाद भी ज्यादा है| किन्तु अगर अच्छा कॉलेज चुना जाये तो ही फ़ायदा है|
    अच्छी कविता है….

  16. 17 @Ankit
    अक्टूबर 15, 2010 को 16:57

    Muje ek joke yaad aa gaya:
    Ek baar ek LADKA bus se ja rha tha. Tabhi Driver ne BREAK lagaya aur wo aage khadi ek LADKI se takra gaya.
    LADKI: Hey…, What r u doing?
    LADKA: ENGINEERING………….!!!
    THAT’s spirit of true engineer.
    (BURA MAT MANO JOKE….)
    Keep it up…Nice poem gr88888888888

  17. 18 Rajeev Tirpathi
    अक्टूबर 18, 2010 को 01:12

    WONDERFUL POEM..
    LAST 4 LINES POINTS TO A IMPORTANT ISSUE.
    DO UR BEST IN ANY FIELD WERE U FIND URSELF AT TOP , THAT’ S THE SPIRIT OF TRUE EDUCATION.

  18. 19 प्रतीक सिंह
    अक्टूबर 19, 2010 को 02:42

    अति सुन्दर!
    विषय का चयन सभी से हट कर है,
    प्रस्तुतीकरण बड़ा ही निराला है.

  19. 20 Amita Singh
    अक्टूबर 20, 2010 को 02:55

    Jo kuch nahin ban saka woh bhi bas kisi gali-koonche ke collage se b-tech ki degree haasil kar khud ko RAJA BHOJ samajh raha hai..
    **nice poem**

  20. 21 स्मिता राय
    अक्टूबर 23, 2010 को 14:04

    बहुत ही अच्छा व्यंग..आज की शिक्षा प्रणाली पर..
    सबसे ज़रूरी है अपने हुनर की पहचान करना और कुछ देश की प्रगति के लिए करना..

  21. 22 Vivek kumar jain
    अक्टूबर 30, 2010 को 18:50

    bahut hi acchi kavita hai. Aaj maa-baap bacchon ki praribhaon ka hanan kar rahe hain. Unhe matra Kitabi-Keeda banana anuchit hoga.

  22. 24 Tasleem Ali
    दिसम्बर 5, 2010 को 21:19

    बहुत ही सुन्दर कविता! बड़ा ही अच्छा विषय चुना है और वर्तमान स्थिति पर शूक्ष्म व्यंग किया है.
    शुभकामनाएं.
    आप की विडियो भी सुन कर अच्छा लगा!

  23. 26 प्रदीप वर्मा
    जनवरी 2, 2011 को 23:49

    आज के सामाज का सुन्दर चित्र खींचा है मानस जी| आज हर किसी को पैसे कमाने की ज़ल्दी है| माँ बाप की सोंच गलत नहीं है की बच्चे उस छेत्र में जाये जिसमे सर्वाधिक तरक्की हो किन्तु उनके हुनर का ध्यान अवश्य रखना चाहिए|
    मैं आप की बात से सैट प्रतिशत सहमत हूँ..
    “Mushroom से खुलते कॉलेज…..”

  24. 27 acne no more
    जनवरी 9, 2011 को 12:33

    Excellent to read from a man who really can talk about it.

  25. 28 Javier Kostyk
    जनवरी 18, 2011 को 14:28

    I got what you intend, thankyou for posting .Woh I am pleased to find this website through google.

  26. 29 Divyansh
    मार्च 4, 2011 को 14:42

    bht khoob manas bhai….kya kamaal ka likha hai par aap engg nhi hai na isliye uski dursi side nhi jante jo bache galti se engg me aa to jate hai aur stuggle karte rahte hai aur fail b ho jate….bht log isse mazak me likh dete hai bht ye ek gambhir vichaar hai..shandaar!!

  27. 30 Varsha Vaish
    जून 8, 2011 को 17:44

    इंजीनियरिंग पर पहली बार किसी युवा से ऐसा कुछ सुन रही हूँ| आज कल तो जिसे देखो वोह ही इंजिनियर| सही कहा आपने-“मुशरूम से खुलते कॉलेज….”| अपनी प्रतिभा के अनुसार ही कर्म कर सफलता प्राप्त की जा सकती है| आप के विचारों से सहमत हूँ..आपकी रचना विडियो के माध्यम से भी सुनी और एक युवा कवी को काव्य पथ करते देख तसल्ली हुई की हमारी भाषा सुरक्षित हाथों में है|

  28. अगस्त 21, 2011 को 22:56

    very nice points- right on top of the virus head. i liked reading the poem over and over again. the strong usage of words by you is really worth appreciating:-)cheers
    Sush

  29. नवम्बर 24, 2011 को 22:20

    बहुत बेहतरीन व्यंग पोस्ट…..

  30. जून 5, 2013 को 13:57

    Are waah! shandaar rachna hai. Yuva dilon ki aawaaz “Engineer-Aastu”

  31. 35 dakeshwar sahu
    सितम्बर 16, 2013 को 11:35

    aap ki kavita ek nai kranti la degi.nice poet.


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Manas Khatri


Manas Khatri, popularly known as Manas 'Mastana' is a renowned Hindi Poet, Writer and Satirist. Manas wears Technology as a Second Skin and is an Entrepreneur running his own company at the age of 23. He is the Director of Crazybrand Bazaar Pvt Ltd and the Founder/CEO of Digital Jugglers. His First Book of Poetry 'Engineer-आस्तु' has been published at the age of 19 yrs. He is an outstanding performer of Kavi-Sammelans and has performed on TV Channels. His poems are published in various Magazines. Manas Khatri is Hasya-Vyang Visesh. Beside this he also writes Short Story, Play, Geet, Gazal and Chand.
You Can Contact:
Manas Khatri 'Mastana',
Guru Kripa Sadan
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