कवी-परिचय

कवी-परिचय


15 Responses to “कवी-परिचय”


  1. जून 30, 2010 को 01:41

    क्याक खूब लिखा है…शुभकामना!!

  2. जुलाई 28, 2010 को 14:58

    पागल पथिक संग चल के,,,

    आँखों की गलतियों से॥

    मै दीवाना हो गया॥

    पागल पथिक संग चल के॥

    मै परवाना हो गया॥

    रिश्ते बदल गए ॥

    अदब हया खो दी॥

    अपनी ही जिंदगी में॥

    कांटो की बीज बो दी॥

    उसको हमें यूं देखे॥

    जमाना गुजर गया॥

    पागल पथिक संग चल के॥
    मै परवाना हो गया॥

    शायद माहे वह भूल गयी॥

    या मजबूर हो गयी॥

    मिल जाओ हमें बिछड़ के॥

    क्यों दूर हो गयी॥

    चुनरी को तेरे छू के॥

    मै मस्ताना हो गया॥

    पागल पथिक संग चल के॥
    मै परवाना हो गया॥

  3. दिसम्बर 17, 2010 को 19:15

    साक्षात्कार.कॉम ने अपना नया पत्रकारिता नेटवर्क शुरू कर दिया है . आप प्रेसवार्ता.कॉम नेटवर्क से जुड़कर आप समाचार , लेख , कहानिया , कविता , फोटो , विडियो और अपने ब्लॉग को जन जन तक भेज सकते है|

  4. 7 शेकर
    मार्च 14, 2011 को 13:04

    अरे पहले कुछ दर्द सहो फिर शेर मारो।और छोटी उमर में भर पेट खेलो न के दर्द के साये में जलो।
    Bahut hi badhiyan lekhni hai…

  5. सितम्बर 14, 2011 को 19:03

    Hi Manas, I love your poems and sense of humor.Great going.All the best !

  6. जनवरी 4, 2012 को 12:44

    You are the most effective, It is posts like this that maintain me coming back and checking this web site regularly, thanks for the information!

  7. मार्च 29, 2012 को 18:12

    i like your poetry very much.i am affected from it verymuch

  8. अक्टूबर 11, 2012 को 03:17

    I do think all from the concepts you have presented on your post. They’re pretty convincing and will definitely operate. Still, the blogposts are as well short for beginners. May perhaps just you you should extend them a little bit from subsequent time? Thanks to the put up. I have just orederd your book and eagerly waiting for it to arrive.

  9. 12 amar sethiye
    नवम्बर 12, 2013 को 18:53

    I like your poems so much. you are the future of tommorrow.and your poem will be inspiration for poseterity.

  10. नवम्बर 30, 2013 को 18:05

    आद्रणीय संपादक गण,
    प्रणाम,
    मुझे हर्ष हो रहा है कि आप हिंदी के लिये इतना महान कार्य कर रहे हैं। मैंने भी इस क्षेत्र में एक छोटा सा प्रयास किया है। शायद आप का सहियोग मुझे भी मिल सकेगा। मैंने एकमंच नाम से cailing list बनाई है। आप का क्षेत्र बहुत विस्तारित है। आप इस मंच का प्रचार करने में मेरा सहियोग कर सकते हो। मैं नहीं जानता कि मैं आप से इस निवेदन को करने के काबिल भी हूं अन्यथा आप इसे मेरी गल्ति समझें।

    अपनी किसी भी ईमेल द्वारा ekmanch+subscribe@googlegroups.com
    पर मेल भेजकर जुड़ जाईये आप हिंदी प्रेमियों के एकमंच से।हमारी मातृभाषा सरल , सरस ,प्रभावपूर्ण , प्रखर और लोकप्रिय है पर विडंबना तो देखिये अपनों की उपेक्षा का दंश झेल रही है। ये गंभीर प्रश्न और चिंता का विषय है अतः गहन चिंतन की आवश्यकता है। इसके लिए एक मन, एक भाव और एक मंच हो, जहाँ गोष्ठिया , वार्तालाप और सार्थक विचार विमर्श से निश्चित रूप से सकारात्मक समाधान निकलेगे इसी उदेश्य की पूर्ति के लिये मैंने एकमंच नाम से ये mailing list का आरंभ किया है। आज हिंदी को इंटरनेट पर बढावा देने के लिये एक संयुक्त प्रयास की जरूरत है, सभी मिलकर हिंदी को साथ ले जायेंगे इस विचार से हिंदी भाषी तथा हिंदी से प्यार करने वाले सभी लोगों की ज़रूरतों पूरा करने के लिये हिंदी भाषा , साहित्य, चर्चा तथा काव्य आदी को समर्पित ये संयुक्त मंच है। देश का हित हिंदी के उत्थान से जुड़ा है , यह एक शाश्वत सत्य है इस मंच का आरंभ निश्चित रूप से व्यवस्थित और ईमानदारी पूर्वक किया गया है। हिंदी के चहुमुखी विकास में इस मंच का निर्माण हिंदी रूपी पौधा को उर्वरक भूमि , समुचित खाद , पानी और प्रकाश देने जैसा कार्य है . और ये मंच सकारात्मक विचारो को एक सुनहरा अवसर और जागरूकता प्रदान करेगा। एक स्वस्थ सोच को एक उचित पृष्ठभूमि मिलेगी। सही दिशा निर्देश से रूप – रेखा तैयार होगी और इन सब से निकलकर आएगी हिंदी को अपनाने की अद्भ्य चाहत हिंदी को उच्च शिक्षा का माध्यम बनाना, तकनिकी क्षेत्र, विज्ञानं आदि क्षेत्रो में विस्तार देना हम भारतीयों का कर्तव्य बनता है क्योंकि हिंदी स्वंय ही बहुत वैज्ञानिक भाषा है हिंदी को उसका उचित स्थान, मान संमान और उपयोगिता से अवगत हम मिल बैठ कर ही कर सकते है इसके लिए इस प्रकार के मंच का होना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। हमारी एकजुटता हिंदी को फिर से अपने स्वर्ण युग में ले जायेगी। वर्तमान में किया गया प्रयास , संघर्ष , भविष्य में प्रकाश के आगमन का संकेत दे देता है। इस मंच के निर्माण व विकास से ही वो मुहीम निकल कर आयेगी जो हिंदी से जुडी सारे पूर्वग्रहों का अंत करेगी। मानसिक दासता से मुक्त करेगी और यह सिलसिला निरंतर चलता रहे, मार्ग प्रशस्त करता रहे ताकि हिंदी का स्वाभिमान अक्षुण रहे।
    अभी तो इस मंच का अंकुर ही फुटा है, हमारा आप सब का प्रयास, प्रचार, हिंदी से स्नेह, हमारी शक्ति तथा आत्मविश्वास ही इसेमजबूति प्रदान करेगा।
    आज आवश्यक्ता है कि सब से पहले हम इस मंच का प्रचार व परसार करें। अधिक से अधिक हिंदी प्रेमियों को इस मंच से जोड़ें। सभी सोशल वैबसाइट पर इस मंच का परचार करें। तभी ये संपूर्ण मंच बन सकेगा। ये केवल 1 या 2 के प्रयास से संभव नहीं है, अपितु इस के लिये हम सब को कुछ न कुछ योगदान अवश्य करना होगा।
    तभी संभव है कि हम अपनी पावन भाषा को विश्व भाषा बना सकेंगे।
    एकमंच हम सब हिंदी प्रेमियों का साझा मंच है। आप को केवल इस समुह कीअपनी किसी भी ईमेल द्वारा सदस्यता लेनी है। उसके बाद सभी सदस्यों के संदेश या रचनाएं आप के ईमेल इनबौक्स में प्राप्त करेंगे। आप इस मंच पर अपनी भाषा में बात कर सकेंगे।
    कोई भी सदस्य इस समूह को सबस्कराइब कर सकता है। सबस्कराइब के लिये
    http://groups.google.com/group/ekmanch
    यहां पर जाएं। या
    ekmanch+subscribe@googlegroups.com
    पर मेल भेजें।
    इस समूह में पोस्ट करने के लिए,
    ekmanch@googlegroups.com
    को ईमेल भेजें.
    http://groups.google.com/group/ekmanch
    पर इस समूह पर जाएं.

  11. 14 Pooran
    अक्टूबर 18, 2014 को 08:36

    Bahut Achha likha h ….. Aap bahut aage jayenge…

  12. 15 ca Gaurab Garodia
    जुलाई 5, 2016 को 20:23

    Pl text your mobile numbers.


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Manas Khatri, popularly known as Manas 'Mastana' is a renowned Hindi Poet, Writer and Satirist. Manas wears Technology as a Second Skin and is an Entrepreneur running his own company at the age of 23. He is the Director of Crazybrand Bazaar Pvt Ltd and the Founder/CEO of Digital Jugglers. His First Book of Poetry 'Engineer-आस्तु' has been published at the age of 19 yrs. He is an outstanding performer of Kavi-Sammelans and has performed on TV Channels. His poems are published in various Magazines. Manas Khatri is Hasya-Vyang Visesh. Beside this he also writes Short Story, Play, Geet, Gazal and Chand.
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Guru Kripa Sadan
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